॥ दोहा ॥श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार ।वृन्दाविपिन विहारिणी,प्रानावौ बारम्बार ॥जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम ।चरण शरण निज दीजिये, […]
॥ दोहा ॥श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार ।वृन्दाविपिन विहारिणी,प्रानावौ बारम्बार ॥जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम ।चरण शरण निज दीजिये, […]
॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल,प्रेम सहित सिरनाय ।नवग्रह चालीसा कहत,शारद होत सहाय ॥जय जय रवि शशि सोम,बुध जय […]
॥ दोहा॥ देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार। चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥ इनकी सेवा से सदा, मिटते […]
॥ दोहा ॥ जैसे अटल हिमालय, और जैसे अडिग सुमेर । ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे, अविचल खडे कुबेर ॥ […]
॥ दोहा॥ जय जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान ।होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धी बल ज्ञान ॥घट-घट वासी […]
॥ दोहा ॥ जय जय कैला मात हे तुम्हे नमाउ माथ ॥शरण पडूं में चरण में जोडूं दोनों हाथ ॥ […]
॥ दोहा॥ श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद ।श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चौपाई छंद । ॥ चौपाई ॥ […]
॥ दोहा॥ गरुड़ वाहिनी वैष्णवी त्रिकुटा पर्वत धामकाली, लक्ष्मी, सरस्वती, शक्ति तुम्हें प्रणाम। ॥ चौपाई ॥ नमो: नमो: वैष्णो वरदानी,कलि […]
॥ दोहा ॥ सुमिरन कामाख्या करुँ, सकल सिद्धि की खानि ।होइ प्रसन्न सत करहु माँ, जो मैं कहौं बखानि ॥ […]
॥ दोहा ॥ श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान ।श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान ॥ ॥ चौपाई […]