बजरंग बाण: संकट से रक्षा और आत्मबल देने वाला दिव्य पाठ भारतीय भक्ति परंपरा में भगवान हनुमान को शक्ति, साहस […]
Stotram
अगर आप भक्ति को और गहराई से अनुभव करना चाहते हैं, तो स्तोत्रों का पाठ एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। इस श्रेणी में आपको विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र, ललिता सहस्रनाम, शिव तांडव स्तोत्र, राम रक्षा स्तोत्र और अन्य प्रसिद्ध स्तोत्र सरल हिंदी में उपलब्ध हैं।
प्रत्येक स्तोत्र के साथ यह जानकारी दी गई है कि उसका सही तरीके से पाठ कैसे करें, किस समय पाठ करना अधिक फलदायी होता है और पाठ करते समय किन आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से स्तोत्र पाठ करने से मन में शांति आती है, आत्मबल बढ़ता है और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
પરિચય હનુમાનજી ભારતીય સંસ્કૃતિમાં શક્તિ, ભક્તિ અને અડગ વિશ્વાસનું જીવંત પ્રતિક માનવામાં આવે છે. રામાયણમાં તેમને શ્રીરામના અતિપ્રિય ભક્ત તરીકે […]
महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी। स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः।। अथाऽवाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन्। ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः।। १।। अतीतः पंथानं […]
ॐ नमश्चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाच ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥ जय त्वं देवि […]
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण् निभाय च।नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ॥1॥ नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।नमो विशालनेत्रय शुष्कोदर […]
॥ नवग्रह स्तोत्र ॥ अथ नवग्रह स्तोत्र। श्री गणेशाय नमः।जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महदद्युतिम्।तमोरिंसर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम्॥१॥ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम्।नमामि शशिनं सोमं […]
॥ सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥शिव उवाचशृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं […]
अथ ध्यानम्:ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥ राम रक्षा स्तोत्रम्:चरितं […]
ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः पूर्व पिठिता ततो युद्धपरिश्रान्तं […]
मातङ्गीं मधुपानमत्तनयनां मातङ्ग सञ्चारिणीं कुम्भीकुम्भविवृत्तपीवरकुचां कुम्भादिपात्राञ्चिताम् । ध्यायेऽहं मधुमारणैकसहजां ध्यातुस्सुपुत्रप्रदां शर्वाणीं सुरसिद्धसाध्यवनिता संसेविता पादुकाम् ॥ १॥ मातङ्गी महिषादिराक्षसकृतध्वान्तैकदीपो मणिः मन्वादिस्तुत […]
अगर आप भक्ति को और गहराई से अनुभव करना चाहते हैं, तो स्तोत्रों का पाठ एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। इस श्रेणी में आपको विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र, ललिता सहस्रनाम, शिव तांडव स्तोत्र, राम रक्षा स्तोत्र और अन्य प्रसिद्ध स्तोत्र सरल हिंदी में उपलब्ध हैं।
प्रत्येक स्तोत्र के साथ यह जानकारी दी गई है कि उसका सही तरीके से पाठ कैसे करें, किस समय पाठ करना अधिक फलदायी होता है और पाठ करते समय किन आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से स्तोत्र पाठ करने से मन में शांति आती है, आत्मबल बढ़ता है और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
પરિચય હનુમાનજી ભારતીય સંસ્કૃતિમાં શક્તિ, ભક્તિ અને અડગ વિશ્વાસનું જીવંત પ્રતિક માનવામાં આવે છે. રામાયણમાં તેમને શ્રીરામના અતિપ્રિય ભક્ત તરીકે […]
महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी। स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः।। अथाऽवाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन्। ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः।। १।। अतीतः पंथानं […]
ॐ नमश्चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाच ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥ जय त्वं देवि […]
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण् निभाय च।नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ॥1॥ नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।नमो विशालनेत्रय शुष्कोदर […]
॥ नवग्रह स्तोत्र ॥ अथ नवग्रह स्तोत्र। श्री गणेशाय नमः।जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महदद्युतिम्।तमोरिंसर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम्॥१॥ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम्।नमामि शशिनं सोमं […]
॥ सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥शिव उवाचशृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं […]
अथ ध्यानम्:ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥ राम रक्षा स्तोत्रम्:चरितं […]
ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः पूर्व पिठिता ततो युद्धपरिश्रान्तं […]
मातङ्गीं मधुपानमत्तनयनां मातङ्ग सञ्चारिणीं कुम्भीकुम्भविवृत्तपीवरकुचां कुम्भादिपात्राञ्चिताम् । ध्यायेऽहं मधुमारणैकसहजां ध्यातुस्सुपुत्रप्रदां शर्वाणीं सुरसिद्धसाध्यवनिता संसेविता पादुकाम् ॥ १॥ मातङ्गी महिषादिराक्षसकृतध्वान्तैकदीपो मणिः मन्वादिस्तुत […]