॥ दोहा ॥ मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज ।माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज ॥ ॥ चौपाई ॥ […]
॥ दोहा ॥ मूर्ति स्वयंभू शारदा, मैहर आन विराज ।माला, पुस्तक, धारिणी, वीणा कर में साज ॥ ॥ चौपाई ॥ […]
॥ दोहा ॥ वन्दो वीरभद्र शरणों शीश नवाओ भ्रात ।ऊठकर ब्रह्ममुहुर्त शुभ कर लो प्रभात ॥ज्ञानहीन तनु जान के भजहौंह […]
॥ दोहा ॥ धरा धर्म हित कर्म कर, जीवन मनुज सुधार ।ब्रह्मा संरक्षण भू का किए, भव जीवन आधार ॥ […]
॥ दोहा ॥ मनसा माँ नागेश्वरी, कष्ट हरन सुखधाम ।चिंताग्रस्त हर जीव के, सिद्ध करो सब काम ॥देवी घट-घट वासिनी, […]
॥ दोहा ॥ प्रियसंग क्रीड़ा करत नित, सुखनिधि वेद को सार । दरस परस ते पाप मिटे, श्रीकृष्ण प्राण आधार […]
॥ दोहा ॥ ॐ नमो गणपति गुरू , नमो सरस्वती माया देव सुयशवर्णन करूँ , कण्ठ विराजोआय ॥॥चौपाई॥ नमो देव […]
वीतराग सर्वज्ञ जिन, जिन वाणी को ध्याय । लिखने का साहस करुं, चालीसा सिर नाय । देहरे के श्रीचन्द्र को, […]
दोहा नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड । दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ।। मधु केटभ […]
।।दोहा।। शक्ति पीठ मां ज्वालपा धरूं तुम्हारा ध्यान । हृदय से सिमरन करूं दो भक्ति वरदान ।। सुख वैभव सब […]
। दोहा । नैनों में बसती छवि दुर्गे नैना मात। प्रातः काल सिमरन करू हे जग की विख्यात।। सुख वैभव […]