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Shri Vishwakarma Aarti – विश्वकर्मा जी की आरती

भगवान विश्वकर्मा की आरती करते हुए भक्त और शिल्पी देव की मूर्ति

विश्वकर्मा जी की आरती: शिल्प और सृजन के देवता की भक्ति

भारतीय परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के महान शिल्पकार और निर्माण के देवता के रूप में पूजा जाता है।
उन्हें देवताओं का वास्तुकार भी कहा जाता है, जिन्होंने स्वर्ग, पुष्पक विमान, द्वारका नगरी और अनेक दिव्य यंत्रों का निर्माण किया।

आज भी कारखानों, इंजीनियरिंग संस्थानों, वाहन मालिकों और कारीगरों के बीच भगवान विश्वकर्मा की आरती अत्यंत श्रद्धा के साथ गाई जाती है।
यह आरती केवल पूजा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमें सृजन, परिश्रम और कुशलता का महत्व भी सिखाती है।

अगर आप रोज सुबह या किसी कार्य की शुरुआत से पहले भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हैं, तो कई लोगों का अनुभव है कि काम में एकाग्रता और सफलता बढ़ती है।

मूल आरती

ओम् जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा।

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।

ओम् जय श्री …

ऋषि अंगिरा तप से, शान्ति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई।।

ओम् जय श्री …

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना।।

ओम् जय श्री …

जब रथकार दम्पत्ति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी।।

ओम् जय श्री …

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज चतुर्भुज दसभुज, सकल रूप साजे॥

ओम् जय श्री …

ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शान्ति पावे।।

ओम् जय श्री …

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
भक्त गजानन स्वामी, सुख संपत्ति पावे ॥

ओम् जय श्री …

आरती का सरल अर्थ और महत्व

इस आरती में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के रचनाकार और संरक्षक के रूप में सम्मान दिया गया है।
पहली पंक्ति बताती है कि वे समस्त ब्रह्मांड के निर्माता हैं और धर्म की रक्षा करते हैं।

दूसरे पद में कहा गया है कि सृष्टि की शुरुआत में उन्होंने ज्ञान और वेदों की शिक्षा देकर जीवों को विकास का मार्ग दिखाया।

आगे की पंक्तियों में यह बताया गया है कि जो भी भक्त श्रद्धा से उनका स्मरण करता है, उसकी कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं।

आरती का अंतिम भाग यह संदेश देता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव से इस आरती का गायन करता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

भगवान विश्वकर्मा भारतीय संस्कृति में तकनीक, वास्तु और सृजन के प्रतीक हैं।
पुराणों में उन्हें देवताओं के दिव्य वास्तुकार के रूप में वर्णित किया गया है।

  • विश्वकर्मा पूजा औद्योगिक संस्थानों में विशेष रूप से मनाई जाती है।
  • इस दिन मशीनों और औजारों की पूजा की जाती है।
  • यह परंपरा हमें काम और साधनों के प्रति सम्मान करना सिखाती है।

वास्तविक जीवन में उपयोग

कई लोगों के लिए यह आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन की प्रेरणा भी है।

  • अगर आप किसी नए व्यवसाय या कार्य की शुरुआत कर रहे हैं तो आरती गाकर शुरुआत करना शुभ माना जाता है।
  • इंजीनियरिंग या तकनीकी क्षेत्र के छात्र परीक्षा से पहले भगवान विश्वकर्मा का ध्यान कर सकते हैं।
  • कई कारीगर सुबह काम शुरू करने से पहले उपकरणों को प्रणाम करते हैं।
  • मेरे अनुभव में, जब व्यक्ति अपने काम को पूजा समझकर करता है तो उसका परिणाम भी बेहतर होता है।

आरती के दौरान ध्यान और मंत्र जप

  • सबसे पहले भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।
  • स्वच्छ मन से बैठकर उनका ध्यान करें।
  • आरती का गायन शांत और श्रद्धा से करें।
  • आरती के बाद ऊपर बताए गए मंत्रों का 11 या 21 बार जप करें।

लाभ

  • मन में एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है
  • कार्य में सफलता और प्रगति की भावना आती है
  • नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है
  • काम के प्रति सम्मान और अनुशासन बढ़ता है
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है

आरती के उपयोग की सारणी

स्थिति आरती लाभ
नया व्यवसाय शुरू करना विश्वकर्मा आरती सफलता और शुभ शुरुआत
तकनीकी शिक्षा विश्वकर्मा स्मरण ज्ञान और कौशल में वृद्धि
कारखाना या कार्यस्थल आरती और पूजा सुरक्षा और समृद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या विश्वकर्मा जी की आरती रोज गाई जा सकती है?

हाँ, इसे रोज सुबह या काम शुरू करने से पहले गाया जा सकता है।

विश्वकर्मा पूजा कब होती है?

आमतौर पर भाद्रपद मास में विश्वकर्मा जयंती के दिन यह पूजा की जाती है।

क्या विद्यार्थी भी इस आरती का पाठ कर सकते हैं?

हाँ, यह आरती विद्यार्थियों को एकाग्रता और प्रेरणा देती है।

क्या आरती गाने के लिए कोई विशेष नियम है?

मुख्य नियम केवल श्रद्धा और स्वच्छता है।

क्या मशीनों की पूजा करना आवश्यक है?

यह परंपरा हमारे साधनों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

क्या इस आरती से मानसिक शांति मिलती है?

हाँ, नियमित भक्ति से मन शांत और सकारात्मक रहता है।

भगवान विश्वकर्मा की आरती केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह हमें सृजन, परिश्रम और कौशल का महत्व सिखाती है।

अगर आप अपने काम को पूजा की तरह करने लगें और दिन की शुरुआत भगवान विश्वकर्मा के स्मरण से करें, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस होने लगता है।

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