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शनिदेव स्तुति – Shanidev Stuti

Shani Dev

शनिदेव को न्याय के देवता माना जाता है, जो कर्म के अनुसार फल देने वाले हैं। जीवन में जब कठिन समय आता है, तब लोग शनिदेव की उपासना और स्तुति का सहारा लेते हैं। यह केवल भय से जुड़ी पूजा नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, अनुशासन और धैर्य का अभ्यास भी है।

शनिदेव स्तुति का नियमित पाठ मन को स्थिर करता है और व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति जागरूक बनाता है।

।। शनिदेव स्तुति मंत्र ।।

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकंठनिभाय च।
नम: कालाग्रिरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥

नमो निर्मासदेहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो: विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णे च वै पुन:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदष्ट्रं नमोस्तुते॥

नमस्ते कोटरक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय करालिने॥

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेस्तु भास्करेअभयदाय च॥

अधोदृष्टे नमस्तेस्तु संवर्तक नमोस्तुते।
नमो मंदगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोस्तुते॥

ज्ञान चक्षुर्नमस्तेस्तु कश्पात्मजसूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रूष्टो हरिस तत्क्षणात्‌॥

देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:।।

प्रसाद कुरु मे सौरे वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल:।।

शनिदेव स्तुति क्या है

शनिदेव स्तुति एक प्रार्थना है, जिसमें शनिदेव की महिमा, न्यायप्रियता और कृपा का वर्णन किया जाता है। इसका उद्देश्य जीवन में संतुलन और संयम लाना है।

शनिदेव का महत्व

शनिदेव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता माने जाते हैं और जीवन में अनुशासन सिखाते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण हैं शनिदेव

  • वे न्याय के प्रतीक हैं
  • कर्मों का सटीक फल देते हैं
  • जीवन में अनुशासन सिखाते हैं
  • धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं

शनिदेव स्तुति के लाभ

मानसिक शांति

नियमित पाठ से मन शांत होता है।

धैर्य और संयम

यह कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने में मदद करता है।

नकारात्मकता में कमी

नकारात्मक विचार कम होते हैं और सकारात्मक सोच बढ़ती है।

आत्मचिंतन

व्यक्ति अपने कर्मों पर ध्यान देना शुरू करता है।

शनिदेव स्तुति कैसे करें

1. सही समय

शनिवार, सुबह या शाम का समय उपयुक्त है।

2. स्थान

शांत स्थान चुनें।

3. ध्यान

मन को शांत करें।

4. पाठ

धीरे-धीरे और समझ के साथ पढ़ें।

5. नियमितता

नियमित अभ्यास बनाए रखें।

ध्यान रखने वाली बातें

  • एकाग्रता रखें
  • अर्थ समझें
  • दिखावे से बचें
  • नियमित रहें

कब करें शनिदेव स्तुति

  • शनिवार
  • शनि अमावस्या
  • सुबह सूर्योदय
  • शाम सूर्यास्त

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शनिदेव स्तुति रोज कर सकते हैं?

हाँ, रोज कर सकते हैं।

क्या विशेष नियम जरूरी हैं?

नहीं, केवल श्रद्धा और शांति जरूरी है।

कितनी बार करनी चाहिए?

एक बार भी पर्याप्त है।

क्या इससे कठिन समय दूर होता है?

यह मन को मजबूत बनाती है।

क्या शुरुआती लोग कर सकते हैं?

हाँ, यह सरल है।

शनिदेव स्तुति जीवन में अनुशासन, धैर्य और संतुलन लाने का माध्यम है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति जागरूक बनता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव अनुभव करता है।


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